अ-सुलभ-हरि-संचारं जल-मूलं बहल-पङ्क-रुद्धाऽऽयामम् । भण किं जल-परिहीणं सु-गमं तिमि-कम्बु-वारि-वारण-भीमम् ॥
Metre: आर्यागीति
गन्तुं लङ्का-तीरं बद्ध-महासलिल-संचरेण स-हेलम् । तरु-हरिणा गिरि-जालं वहन्तु गिरि-भार-संसहा गुरु-देहम् ॥
हर-हास-रुद्ध-विगमं पर-कण्ठ-गणं महाऽऽहव-समारम्भे । छिन्दन्तु राम-बाणा गम्भीरे मे जले महा-गिरि-बद्धे ॥
Metre: आर्यागीति
गच्छन्तु चारु-हासा वीर-रसाऽऽबन्ध-रुद्ध-भय-संबन्धम् । हन्तुं बहु-बाहु-बलं हरि-करिणो गिरि-वरोरु-देहं सहसा ॥
Metre: आर्यागीति
जिगमिषया संयुक्ता बहूव कपि-वाहिनी मते दाशरथेः । बुद्ध-जलाऽऽलय-चित्ता गिरि-हरणाऽऽरम्भ-संभव-समालोला ॥
Metre: आर्यागीति
गुरु-गिरि-वर-हरण-सहं संहार-हिमारि-पिङ्गलं राम-बलम् ।आरूढं सहसा खं वरुणाऽऽलय-विमल-सलिल-गण-गम्भीरम् ॥
Metre: आर्यागीति
अवगाढं गिरि-जालं तुङ्ग-महा-भित्ति-रुद्ध-सुर-संचारम् ।अ-भयहरि-रास-भीमं करि-परिमल-चारु-बहल-कन्दर-सलिलम् ॥
Metre: आर्यागीति
अलि-गण-विलोल-कुसुमं स-कमल-जल-मत्त-कुरर-कारण्डव-गणम् । फणि-संकुल-भीम-गुहं करि-दन्त-समूढ-स-रस-वसुधा-खण्डम् ॥
अरविन्द-रेणु-पिञ्जर- सारस-रव-हारि-विमल-बहु-चारु-जलम् । रवि-मणि-संभव-हिम-हर- समागमाऽऽबद्ध-बहुल-सुर-तरु-धूपम् ॥
Metre: आर्यागीति
हरि-रव-विलोल-वारण- गम्भीराऽऽबद्ध-स-रस-पुरु-संरावम् । घोणा-संगम-पङ्काऽऽ- विल-सुबल-भर-महोरु-वराहम् ॥
Metre: गीति