चारु-समीरण-रमणे हरिण-कलङ्क-किरणाऽऽवली-स-विलासा ।आबद्ध-राम-मोहा वेला-मूले विभावरी परिहीणा ॥
बद्धो वासर-सङ्गे भीमो रामेण लवण-सलिलाऽऽवासे । सहसा संरम्भ-रसो दूराऽऽरूढ-रवि-मण्डल-समो लोले ॥
Metre: आर्यागीति
गाढ-गुरु-पुङ्ख-पीडा- स-धूम-सलिलाऽरि-संभव-महा-बाणे ।आरुढा संदेहं रामे स-मही-धार मही स-फणि-सभा ॥
घोर-जल-दन्ति-संकुल- मट्ट-महापङ्क-काहल-जलाऽऽवासम् ।आरीणं लवण-जलं समिद्ध-फल-बाण-विद्धि-घोर-फणि-वरम् ॥
Metre: आर्यागीति
स-भयं परिहरमाणो महाऽहि-संचार-भासुरं सलिल-गणम् ।आरूढो लवण-जलो जल-तीरं हरि-बलाऽऽगम-विलोल-गुहम् ॥
Metre: आर्यागीति
चञ्चल-तरु-हरिण-गणं बहु-कुसुमाऽऽबन्ध-बद्ध-रामाऽऽवासम् । हरि-पल्लव-तरु-जालं तुङ्गोरु-समिद्ध-तरु-वर-हिम-च्छायम् ॥
Metre: आर्यागीति
वर-वारनं सलिल-भरेण गिरि-मही-मण्डल-संवर-वारणम् । वसुधार्यं तुङ्ग-तरङ्ग-सङ्ग-परिहीण-लोल-वसुधा-रयम् ॥
Metre: उपजातिः
प्रणिपत्य ततो वचनं जगाद हितमायतो पतिर्वारीणाम् । गङ्गाऽवलम्बि-बाहू रामं बहलोरु-हरि-तमाल-च्छायम् ॥
Metre: आर्यागीति
"तुङ्गा गिरि-वर-देहा अ-गमं सलिलं समीरणो रस-हारी ।अ-हिमो रवि-किरण-गणो माया संसार-कारणं ते परमा ॥
Metre: आर्यागीति
आयास-संभवारुण ! संहर संहार-हिम-हर-सम-च्छायम् । बाणं वारि-समूहं संगच्छ पुराण-चारु-देहाऽऽवासम् ॥
Metre: आर्यागीति