फल-भर-मन्थर-तरु-वर- म-विदूर-विरूढ-हारि-कुसुमाऽऽपीडम् । हरिण-कलङ्क-मणि-संभव- बहु-वारि-भर-सुगम्भीर-गुहम् ॥
Metre: उपजातिः
जल-काम-दन्ति-संकुल- स-हेम-रस-चारु-धवल-कन्दर-देहम् ।अङ्कुर-तोह-सम-च्छवि- रुरु-गण-संलीढ-तरल-हरि-मणि-किरणम् ॥
Metre: आर्यागीति
गाढ-समीरण-सुसहं भीम-रवोत्तुङ्ग-वारि-धर-संघट्टम् । धवल-जल-वाह-माला- संबन्धाऽऽबद्ध-हिम-धरा-धर-लीलम् ॥
Metre: आर्यागीति
लवण-जल-बन्ध-स-रसं तरु-फल-संपत्ति-रुद्ध-देहाऽऽयासम् । लङ्का-तोरण-वारण- मारूढं समर-लालसं-राम-बलम् ॥
Metre: आर्यागीति
गुरु-पणव-वेणु-गुञ्जा- भेरी-पेलोरु-झल्लरी-भीम-रवम् । ढक्का-घण्टा-तुमुलं सन्नद्धं पर-बलं रणाऽऽयास-सहम् ॥
Metre: आर्यागीति
आरूढ-बाण-घोरं वि-मलाऽऽयस-जाल-गूढ-पीवर-देहम् । चञ्चल-तुरङ्ग-वारण- संघट्टाऽऽबद्ध-चारु-परिणाह-गुणम् ॥
Metre: आर्यागीति
असि-तोमर-कुन्त-महा- पट्टिश-भल्ल-वर-बाण-गुरु-पुरु-मुसलम् । वीर-रसाऽलङ्कारं गुरु-संचार-हय-दन्ति-स-मही-कम्पम् ॥
Metre: आर्यागीति
ते रामेण स-रभसं परितरला हरि-गणा रण-समारम्भे । रुद्धा लङ्का-परिसर- भू-धर-परिभङ्ग-लालसा धीर-रवम् ॥
Metre: आर्यागीति
युग्मकम्जल-तीर-तुङ्ग-तरु-वर- कन्गर-गिरि-भित्ति-कुञ्ज-विवराऽऽवासम् । भीमं तरु-हरिण-बलं सु-समिद्ध-हिमारि-किरण-माला-लोलम् ॥
रावण-बलमवगन्तुं जल-भर-गुरु-सलिल-वाह-गण-सम-च्छायम् ।अट्ट-तरु-मञ्च-मन्द्रिर- तोरण-माला-सभासु समारूढम् ॥
Metre: उपजातिः