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Currently viewing: Parva 9 -
Chapter 9.44
(110 verses)
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Sanskrit Text
सहस्रशः
पारिषदाः
कुमारमुपतस्थिरे
।
वक्त्रैर्नानाविधैर्ये
तु
शृणु
ताञ्जनमेजय
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सहस्रशः | पारिषदाः | कुमारम् | उपतस्थिरे
वक्त्रैर् | नानाविधैर् | ये | तु | शृणु | ताञ् | जनमेजय
वक्त्रैर् | नानाविधैर् | ये | तु | शृणु | ताञ् | जनमेजय