Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 8 -
Chapter 8.46
(48 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
यस्यायमगमत्कालश्चिन्तयानस्य
मे
विभो
।
कथं
शक्यो
मया
कर्णो
युद्धे
क्षपयितुं
भवेत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
यद् + इदम् | अगमत् | कालश् | चिन्तयानस्य | मे | विभो
कथं | शक्यो | मया | कर्णो | युद्धे | क्षपयितुं | भवेत्
कथं | शक्यो | मया | कर्णो | युद्धे | क्षपयितुं | भवेत्