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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.44
(30 verses)
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Sanskrit Text
क्षत्रियाणामनीकानि
प्रद्रुतान्यभिधावताम्
।
जग्रास
तिमिरासाद्य
क्षुद्रमत्स्यानिवार्णवे
॥
Padaccheda (Word Analysis)
क्षत्रियाणाम् | अनीकानि | प्रद्रु + अभिधाव्
जग्रास | तिमिर् | आसाद्य | क्षुद्र + मत्स्य | इव + अर्णव
जग्रास | तिमिर् | आसाद्य | क्षुद्र + मत्स्य | इव + अर्णव