Vidya Kendra
Mahābhārata
Home Introduction Reader Glossary All Resources
Vidyakendra
Vidyakendra Home

Navigate to Verse

Currently viewing: Parva 7 - Chapter 7.44 (30 verses)
Powered by Aksharamukha

Search Mahābhārata

Try searching for: dharma, युद्ध, Arjuna, 1.1.5 (verse reference)
Quick Navigation: Start Browse Parvas
❖ ❖ ❖

Chapter 7.44

आददानस्तु शूराणामायूंष्यभवदार्जुनिः अन्तकः सर्वभूतानां प्राणान्काल इवागते
View Padaccheda
आदा + तु | शूराणाम् | आयुस् + भू | आर्जुनिः
अन्तकः | सर्व + भूत | प्राणान् | काल | इव + आगम्
शक्र इव विक्रान्तः शक्रसूनोः सुतो बली अभिमन्युस्तदानीकं लोडयन्बह्वशोभत
View Padaccheda
स | शक्र | इव | विक्रान्तः | शक्र + सूनु | सुतो | बली
अभिमन्यु + तदा + अनीक | लोडयन् | बहु + शुभ्
प्रविश्यैव तु राजेन्द्र क्षत्रियेन्द्रान्तकोपमः सत्यश्रवसमादत्त व्याघ्रो मृगमिवोल्बणम्
View Padaccheda
प्रविश् + एव | तु | राजन् + इन्द्र | क्षत्रिय + इन्द्र + अन्तक + उपम
सत्यश्रवसम् | आदत्त | व्याघ्रो | मृगम् | इव + उल्बण
सत्यश्रवसि चाक्षिप्ते त्वरमाणा महारथाः प्रगृह्य विपुलं शस्त्रमभिमन्युमुपाद्रवन्
View Padaccheda
सत्यश्रवसि | च + आक्षिप् | त्वरमाणा | महत् + रथ
प्रगृह्य | विपुलं | शस्त्रम् | अभिमन्युम् | उपाद्रवन्
अहं पूर्वमहं पूर्वमिति क्षत्रियपुंगवाः स्पर्धमानाः समाजग्मुर्जिघांसन्तोऽर्जुनात्मजम्
View Padaccheda
अहं | पूर्वम् | अहं | पूर्वम् | इति | क्षत्रिय + पुंगव
स्पर्धमानाः | समाजग्मुर् | जिघांसन्तो | अर्जुन + आत्मज
क्षत्रियाणामनीकानि प्रद्रुतान्यभिधावताम् जग्रास तिमिरासाद्य क्षुद्रमत्स्यानिवार्णवे
View Padaccheda
क्षत्रियाणाम् | अनीकानि | प्रद्रु + अभिधाव्
जग्रास | तिमिर् | आसाद्य | क्षुद्र + मत्स्य | इव + अर्णव
ये केचन गतास्तस्य समीपमपलायिनः ते प्रतिन्यवर्तन्त समुद्रादिव सिन्धवः
View Padaccheda
ये | केचन | गम् + तद् | समीपम् | अपलायिनः
न | ते | प्रतिन्यवर्तन्त | समुद्राद् | इव | सिन्धवः
महाग्राहगृहीतेव वातवेगभयार्दिता समकम्पत सा सेना विभ्रष्टा नौरिवार्णवे
View Padaccheda
महत् + ग्राह + ग्रह् + इव | वात + वेग + भय + अर्दय्
समकम्पत | सा | सेना | विभ्रष्टा | नौर् | इव + अर्णव
अथ रुक्मरथो नाम मद्रेश्वरसुतो बली त्रस्तामाश्वासयन्सेनामत्रस्तो वाक्यमब्रवीत्
View Padaccheda
अथ | रुक्मरथो | नाम | मद्र + ईश्वर + सुत | बली
त्रस्ताम् | आश्वासयन् | सेनाम् | अत्रस्तो | वाक्यम् | अब्रवीत्
अलं त्रासेन वः शूरा नैष कश्चिन्मयि स्थिते अहमेनं ग्रहीष्यामि जीवग्राहं संशयः
View Padaccheda
अलं | त्रासेन | वः | शूरा | न + एतद् | कश्चित् + मद् | स्थिते
अहम् | एनं | ग्रहीष्यामि | जीव + ग्रह् | न | संशयः
एवमुक्त्वा तु सौभद्रमभिदुद्राव वीर्यवान् सुकल्पितेनोह्यमानः स्यन्दनेन विराजता
View Padaccheda
एवम् | उक्त्वा | तु | सौभद्रम् | अभिदुद्राव | वीर्यवान्
सु + कल्पय् + वह् | स्यन्दनेन | विराजता
सोऽभिमन्युं त्रिभिर्बाणैर्विद्ध्वा वक्षस्यथानदत् त्रिभिश्च दक्षिणे बाहौ सव्ये निशितैस्त्रिभिः
View Padaccheda
सो | ऽभिमन्युं | त्रिभिर् | बाणैर् | विद्ध्वा | वक्षस् + अथ + नद्
त्रि + च | दक्षिणे | बाहौ | सव्ये | च | निशा + त्रि
तस्येष्वसनं छित्त्वा फाल्गुणिः सव्यदक्षिणौ भुजौ शिरश्च स्वक्षिभ्रु क्षितौ क्षिप्रमपातयत्
View Padaccheda
स | लक्ष्मण + इष्वसन | छित्त्वा | लक्ष्म | च | भारत
धनुर् | ध्वजं | च | छत्रं | च | क्षितौ | क्षिप्रम् | अपातयत्
दृष्ट्वा रुक्मरथं रुग्णं पुत्रं शल्यस्य मानिनम् जीवग्राहं जिघृक्षन्तं सौभद्रेण यशस्विना
View Padaccheda
दृष्ट्वा | रुक्मरथं | रुग्णं | पुत्रं | शल्यस्य | मानिनम्
जीव + ग्रह् | जिघृक्षन्तं | सौभद्रेण | यशस्विना
संग्रामदुर्मदा राजन्राजपुत्राः प्रहारिणः वयस्याः शल्यपुत्रस्य सुवर्णविकृतध्वजाः
View Padaccheda
संग्राम + दुर्मद | राजन् | राजन् + पुत्र | प्रहारिणः
कृ + अभिसमय | सर्वे | सुवर्ण + विकृ + ध्वज
तालमात्राणि चापानि विकर्षन्तो महारथाः आर्जुनिं शरवर्षेण समन्तात्पर्यवारयन्
View Padaccheda
ताल + मात्र | चापानि | विकर्षन्तो | महत् + रथ
किरतां | शर + वर्ष | स | नागः | पर्यवर्तत
शूरैः शिक्षाबलोपेतैस्तरुणैरत्यमर्षणैः दृष्ट्वैकं समरे शूरं सौभद्रमपराजितम्
View Padaccheda
शूरैः | शिक्षा + बल + उपे + तरुण | अति + अमर्षण
दृश् + एक | समरे | शूरं | सौभद्रम् | अपराजितम्
छाद्यमानं शरव्रातैर्हृष्टो दुर्योधनोऽभवत् वैवस्वतस्य भवनं गतमेनममन्यत
View Padaccheda
छाद्यमानं | शर + व्रात | हृष्टो | दुर्योधनो | ऽभवत्
वैवस्वतस्य | भवनं | गतम् | एनम् | अमन्यत
सुवर्णपुङ्खैरिषुभिर्नानालिङ्गैस्त्रिभिस्त्रिभिः अदृश्यमार्जुनिं चक्रुर्निमेषात्ते नृपात्मजाः
View Padaccheda
सुवर्ण + पुङ्ख | इषुभिर् | नाना + लिङ्ग + त्रि
अदृश्यम् | आर्जुनिं | चक्रुर् | निमेषात् | ते | नृप + आत्मज
ससूताश्वध्वजं तस्य स्यन्दनं तं मारिष आचितं समपश्याम श्वाविधं शललैरिव
View Padaccheda
स + सूत + अश्व + ध्वज | तस्य | स्यन्दनं | तं | च | मारिष
आचितं | समपश्याम | श्वाविधं | शललैर् | इव
गाढविद्धः क्रुद्धश्च तोत्त्रैर्गज इवार्दितः गान्धर्वमस्त्रमायच्छद्रथमायां योजयत्
View Padaccheda
स | गाढ + व्यध् | क्रुध् + च | तोत्त्रैर् | गज | इव + अर्दय्
गान्धर्वम् | अस्त्रम् | आयच्छद् | रथ + माया | च | योजयत्
अर्जुनेन तपस्तप्त्वा गन्धर्वेभ्यो यदाहृतम् तुम्बुरुप्रमुखेभ्यो वै तेनामोहयताहितान्
View Padaccheda
अर्जुनेन | तपस् + तप् | गन्धर्वेभ्यो | यद् | आहृतम्
तुम्बुरु + प्रमुख | वै | तद् + मोहय् + आधा
एकः शतधा राजन्दृश्यते स्म सहस्रधा अलातचक्रवत्संख्ये क्षिप्रमस्त्राणि दर्शयन्
View Padaccheda
एकः | स | शतधा | राजन् | दृश्यते | स्म | सहस्रधा
अलात + चक्र + वत् | संख्ये | क्षिप्रम् | अस्त्राणि | दर्शयन्
रथचर्यास्त्रमायाभिर्मोहयित्वा परंतपः बिभेद शतधा राजञ्शरीराणि महीक्षिताम्
View Padaccheda
रथ + चर्या + अस्त्र + माया | मोहयित्वा | परंतपः
बिभेद | शतधा | राजञ् | शरीराणि | महीक्षिताम्
प्राणाः प्राणभृतां संख्ये प्रेषिता निशितैः शरैः राजन्प्रापुरमुं लोकं शरीराण्यवनिं ययुः
View Padaccheda
द्रोणेन | चरता | संख्ये | प्रभग्नानि | शितैः | शरैः
राजन् | प्रापुर् | अमुं | लोकं | शरीर + अवनि | ययुः
धनूंष्यश्वान्नियन्तॄंश्च ध्वजान्बाहूंश्च साङ्गदान् शिरांसि शितैर्भल्लैस्तेषां चिच्छेद फाल्गुनिः
View Padaccheda
धनुस् + अश्व + नियन्तृ + च | ध्वजान् | बाहु + च | स + अङ्गद
शिरांसि | च | शितैर् | भल्ल + तद् | चिछेद | फाल्गुनिः
चूतारामो यथा भग्नः पञ्चवर्षफलोपगः राजपुत्रशतं तद्वत्सौभद्रेणापतद्धतम्
View Padaccheda
चूत + आराम | यथा | भग्नः | पञ्चन् + वर्ष + फल + उपग
राजन् + पुत्र + शत | तद्वत् | सौभद्र + पत् + हन्
क्रुद्धाशीविषसंकाशान्सुकुमारान्सुखोचितान् एकेन निहतान्दृष्ट्वा भीतो दुर्योधनोऽभवत्
View Padaccheda
क्रुध् + आशीविष + संकाश | सु + कुमार | सुख + उचित
एकेन | निहतान् | दृष्ट्वा | भीतो | दुर्योधनो | ऽभवत्
रथिनः कुञ्जरानश्वान्पदातींश्चावमर्दितान् दृष्ट्वा दुर्योधनः क्षिप्रमुपायात्तममर्षितः
View Padaccheda
रथिनः | कुञ्जरान् | अश्वान् | पदाति + च + अवमर्दय्
दृष्ट्वा | दुर्योधनः | क्षिप्रम् | उपायात् | तम् | अमर्षितः
तयोः क्षणमिवापूर्णः संग्रामः समपद्यत अथाभवत्ते विमुखः पुत्रः शरशतार्दितः
View Padaccheda
तयोः | क्षणम् | इव + आप्￞ | संग्रामः | समपद्यत
अथ + भू | ते | विमुखः | पुत्रः | शर + शत + अर्दय्