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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.25
(59 verses)
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Sanskrit Text
किमर्जुनश्चाप्यकरोत्संशप्तकबलं
प्रति
।
संशप्तका
वा
पार्थस्य
किमकुर्वत
संजय
॥
Padaccheda (Word Analysis)
किम् | अर्जुन + च + अपि + कृ | संशप्तक + बल | प्रति
संशप्तका | वा | पार्थस्य | किम् | अकुर्वत | संजय
संशप्तका | वा | पार्थस्य | किम् | अकुर्वत | संजय