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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.25
(59 verses)
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Sanskrit Text
स
शरार्पितसर्वाङ्गः
क्रुद्धो
विव्याध
पाण्डवम्
।
नाराचैरर्करश्म्याभैर्भीमसेनं
स्मयन्निव
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | शर + अर्पय् + सर्व + अङ्ग | क्रुद्धो | विव्याध | पाण्डवम्
नाराचैर् | अर्क + रश्मि + आभ | भीमसेनं | स्मयन्न् | इव
नाराचैर् | अर्क + रश्मि + आभ | भीमसेनं | स्मयन्न् | इव