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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.172
(94 verses)
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Sanskrit Text
यं
पश्यन्ति
ब्राह्मणाः
साधुवृत्ताः;
क्षीणे
पापे
मनसा
ये
विशोकाः
।
स
तन्निष्ठस्तपसा
धर्ममीड्यं;
तद्भक्त्या
वै
विश्वरूपं
ददर्श
।
दृष्ट्वा
चैनं
वाङ्मनोबुद्धिदेहैः;
संहृष्टात्मा
मुमुदे
देवदेवम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
यं | पश्यन्ति | ब्राह्मणाः | साधु + वृत्त | क्षीणे | पापे | मनसा | ये | विशोकाः
स | तद् + निष्ठा + तपस् | धर्मम् | ईड्यं | तद् + भक्ति | वै | विश्वरूपं | ददर्श
दृष्ट्वा | च + एनद् | वाच् + मनस् + बुद्धि + देह | संहृष् + आत्मन् | मुमुदे | देवदेवम्
स | तद् + निष्ठा + तपस् | धर्मम् | ईड्यं | तद् + भक्ति | वै | विश्वरूपं | ददर्श
दृष्ट्वा | च + एनद् | वाच् + मनस् + बुद्धि + देह | संहृष् + आत्मन् | मुमुदे | देवदेवम्