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Currently viewing: Parva 7 -
Chapter 7.13
(80 verses)
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Sanskrit Text
तं
कृपः
शरवर्षेण
महता
समवाकिरत्
।
निवार्य
च
रणे
विप्रो
धृष्टकेतुमयोधयत्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तं | कृपः | शर + वर्ष | महता | समवाकिरत्
निवार्य | च | रणे | विप्रो | धृष्टकेतुम् | अयोधयत्
निवार्य | च | रणे | विप्रो | धृष्टकेतुम् | अयोधयत्