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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.93
(41 verses)
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Sanskrit Text
संप्राप्य
तु
ततो
राजा
भीष्मस्य
सदनं
शुभम्
।
अवतीर्य
हयाच्चापि
भीष्मं
प्राप्य
जनेश्वरः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सम्प्राप्य | तु | ततो | राजा | भीष्मस्य | सदनं | शुभम्
अवतीर्य | हय + च + अपि | भीष्मं | प्राप्य | जनेश्वरः
अवतीर्य | हय + च + अपि | भीष्मं | प्राप्य | जनेश्वरः