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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.92
(79 verses)
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Sanskrit Text
तत्राक्रन्दो
महानासीत्तव
तेषां
च
भारत
।
निघ्नतां
भृशमन्योन्यं
कुर्वतां
कर्म
दुष्करम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तत्र + आक्रन्द | महान् | आसीत् | तावकानां | महात्मनाम्
युध्यतां | तु | तथा | तेषां | कुर्वतां | कर्म | दुष्करम्
युध्यतां | तु | तथा | तेषां | कुर्वतां | कर्म | दुष्करम्