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Currently viewing: Parva 6 - Chapter 6.92 (79 verses)
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Chapter 6.92

पुत्रं तु निहतं श्रुत्वा इरावन्तं धनंजयः दुःखेन महताविष्टो निःश्वसन्पन्नगो यथा
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पुत्रं | तु | निहतं | श्रुत्वा | इरावन्तं | धनंजयः
ततः | क्रोध + समाविश् | निःश्वसन्न् | इव | पन्नगः
अब्रवीत्समरे राजन्वासुदेवमिदं वचः इदं नूनं महाप्राज्ञो विदुरो दृष्टवान्पुरा
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अब्रवीत् | समरे | राजन् | वासुदेवम् | इदं | वचः
इदं | नूनं | महत् + प्राज्ञ | विदुरो | दृष्टवान् | पुरा
कुरूणां पाण्डवानां क्षयं घोरं महामतिः ततो निवारयितवान्धृतराष्ट्रं जनेश्वरम्
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कुरूणां | पाण्डवानां | च | यम + राष्ट्र + विवर्धन
ततो | निवारयितवान् | धृतराष्ट्रं | जनेश्वरम्
अवध्या बहवो वीराः संग्रामे मधुसूदन निहताः कौरवैः संख्ये तथास्माभिश्च ते हताः
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अवध्या | बहवो | वीराः | संग्रामे | मधुसूदन
निहताः | कौरवैः | संख्ये | तथा + मद् + च | ते | हताः
अर्थहेतोर्नरश्रेष्ठ क्रियते कर्म कुत्सितम् धिगर्थान्यत्कृते ह्येवं क्रियते ज्ञातिसंक्षयः
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अर्थ + हेतु | नर + श्रेष्ठ | क्रियते | कर्म | कुत्सितम्
धिग् | अर्थान् | यत् + कृते | हि + एवम् | क्रियते | ज्ञाति + संक्षय
अधनस्य मृतं श्रेयो ज्ञातिवधाद्धनम् किं नु प्राप्स्यामहे कृष्ण हत्वा ज्ञातीन्समागतान्
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अधनस्य | मृतं | श्रेयो | न | च | ज्ञाति + वध | धनम्
किं | नु | प्राप्स्यामहे | कृष्ण | हत्वा | ज्ञातीन् | समागतान्
दुर्योधनापराधेन शकुनेः सौबलस्य क्षत्रिया निधनं यान्ति कर्णदुर्मन्त्रितेन
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दुर्योधन + अपराध | शकुनेः | सौबलस्य | च
क्षत्रिया | निधनं | यान्ति | कर्ण + दुर्मन्त्रित | च
इदानीं विजानामि सुकृतं मधुसूदन कृतं राज्ञा महाबाहो याचता स्म सुयोधनम् राज्यार्धं पञ्च वा ग्रामान्नाकार्षीत्स दुर्मतिः
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इदानीं | च | विजानामि | सु + कृ | मधुसूदन
कृतं | राज्ञा | महत् + बाहु | याचता | स्म | सुयोधनम्
राज्य + अर्ध | पञ्च | वा | ग्राम + न + कृ | स | च | दुर्मतिः
दृष्ट्वा हि क्षत्रियाञ्शूराञ्शयानान्धरणीतले निन्दामि भृशमात्मानं धिगस्तु क्षत्रजीविकाम्
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दृष्ट्वा | हि | क्षत्रियाञ् | शूराञ् | शयानान् | धरणी + तल
निन्दामि | भृशम् | आत्मानं | धिग् | अस्तु | क्षत्र + जीविका
अशक्तमिति मामेते ज्ञास्यन्ति क्षत्रिया रणे युद्धं ममैभिरुचितं ज्ञातिभिर्मधुसूदन
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अशक्तम् | इति | माम् | एते | ज्ञास्यन्ति | क्षत्रिया | रणे
युद्धं | मद् + इदम् + उचित | ज्ञातिभिर् | मधुसूदन
संचोदय हयान्क्षिप्रं धार्तराष्ट्रचमूं प्रति प्रतरिष्ये महापारं भुजाभ्यां समरोदधिम् नायं क्लीबयितुं कालो विद्यते माधव क्वचित्
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संचोदय | हयान् | क्षिप्रं | धार्तराष्ट्र + चमू | प्रति
प्रतरिष्ये | महत् + पार | भुजाभ्यां | समर + उदधि
न + इदम् | क्लीबयितुं | कालो | विद्यते | माधव | क्वचित्
एवमुक्तस्तु पार्थेन केशवः परवीरहा चोदयामास तानश्वान्पाण्डुरान्वातरंहसः
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एवम् | वच् + तु | पार्थेन | केशवः | पर + वीर + हन्
चोदयामास | तान् | अश्वान् | पाण्डुरान् | वात + रंहस्
अथ शब्दो महानासीत्तव सैन्यस्य भारत मारुतोद्धूतवेगस्य सागरस्येव पर्वणि
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निष्टानको | महान् | आसीत् | तव | सैन्यस्य | मारिष
मारुत + उद्धू + वेग | सागर + इव | पर्वणि
अपराह्णे महाराज संग्रामः समपद्यत पर्जन्यसमनिर्घोषो भीष्मस्य सह पाण्डवैः
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मध्याह्ने | सु + महत् + रौद्र | संग्रामः | समपद्यत
पर्जन्य + सम + निर्घोष | भीष्मस्य | सह | पाण्डवैः
ततो राजंस्तव सुता भीमसेनमुपाद्रवन् परिवार्य रणे द्रोणं वसवो वासवं यथा
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ततो | राजन् + त्वद् | सुता | भीमसेनम् | उपाद्रवन्
परिवार्य | रणे | द्रोणं | वसवो | वासवं | यथा
ततः शांतनवो भीष्मः कृपश्च रथिनां वरः भगदत्तः सुशर्मा धनंजयमुपाद्रवन्
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ततः | शांतनवो | भीष्मो | रथ + घोष | नादयन्
भगदत्तः | सुशर्मा | च | धनंजयम् | उपाद्रवन्
हार्दिक्यो बाह्लिकश्चैव सात्यकिं समभिद्रुतौ अम्बष्ठकस्तु नृपतिरभिमन्युमवारयत्
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हार्दिक्यो | बाह्लिक + च + एव | सात्यकिं | समभिद्रुतौ
अम्बष्ठक + तु | नृपतिर् | अभिमन्युम् | अवारयत्
शेषास्त्वन्ये महाराज शेषानेव महारथान् ततः प्रववृते युद्धं घोररूपं भयावहम्
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शेष + तु + अन्य | महत् + राज | शेषान् | एव | महत् + रथ
ततः | प्रववृते | युद्धं | व्यतिषञ्ज् + रथ + द्विप
भीमसेनस्तु संप्रेक्ष्य पुत्रांस्तव जनेश्वर प्रजज्वाल रणे क्रुद्धो हविषा हव्यवाडिव
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भीमसेन + तु | सम्प्रेक्ष्य | पुत्र + त्वद् | जनेश्वर
प्रजज्वाल | रणे | क्रुद्धो | हविषा | हव्यवाड् | इव
पुत्रास्तु तव कौन्तेयं छादयां चक्रिरे शरैः प्रावृषीव महाराज जलदाः पर्वतं यथा
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पुत्र + तु | तव | कौन्तेयं | छादयांचक्रिरे | शरैः
प्रावृष् + इव | महत् + राज | जलदाः | पर्वतं | यथा
च्छाद्यमानो बहुधा पुत्रैस्तव विशां पते सृक्किणी विलिहन्वीरः शार्दूल इव दर्पितः
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दुर्योधन + पुरोग + तु | पुत्र + त्वद् | विशां | पते
विलिहन् | वीरः | शार्दूल | इव | दर्पितः
व्यूढोरस्कं ततो भीमः पातयामास पार्थिव क्षुरप्रेण सुतीक्ष्णेन सोऽभवद्गतजीवितः
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व्यूह् + उरस्क | ततो | भीमः | पातयामास | पार्थिव
क्षुरप्रेण | सु + तीक्ष्ण | स | हतो | न्यपतद् | भुवि
अपरेण तु भल्लेन पीतेन निशितेन अपातयत्कुण्डलिनं सिंहः क्षुद्रमृगं यथा
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पूर्ण + आयम् + विसृज् | पीतेन | निशितेन | च
अपातयत् | कुण्डलिनं | सिंहः | क्षुद्र + मृग | यथा
ततः सुनिशितान्पीतान्समादत्त शिलीमुखान् सप्त त्वरया युक्तः पुत्रांस्ते प्राप्य मारिष
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ततः | सु + निशा | पीतान् | समादत्त | शिलीमुखान्
स | सप्त | त्वरया | युक्तः | पुत्र + त्वद् | प्राप्य | मारिष
प्रेषिता भीमसेनेन शरास्ते दृढधन्वना अपातयन्त पुत्रांस्ते रथेभ्यः सुमहारथान्
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प्रेषिता | भीमसेनेन | शर + तद् | दृढधन्वना
अपातयन्त | पुत्र + त्वद् | रथेभ्यः | सु + महत् + रथ
अनाधृष्टिं कुण्डभेदं वैराटं दीर्घलोचनम् दीर्घबाहुं सुबाहुं तथैव कनकध्वजम्
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अनाधृष्टिं | कुण्डभेदं | वैराटं | दीर्घलोचनम्
दीर्घबाहुं | सुबाहुं | च | तथा + एव | कनकध्वजम्
प्रपतन्त स्म ते वीरा विरेजुर्भरतर्षभ वसन्ते पुष्पशबलाश्चूताः प्रपतिता इव
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प्रपतन्त | स्म | ते | वीरा | विरेजुर् | भरत + ऋषभ
वसन्ते | पुष्प + शबल + चूत | प्रपतिता | इव
ततः प्रदुद्रुवुः शेषाः पुत्रास्तव विशां पते तं कालमिव मन्यन्तो भीमसेनं महाबलम्
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तथा + एव | शकुनिः | शूरः | स्याल + त्वद् | विशां | पते
शरैर् | बहुभिर् | आनर्छद् | भीमसेनं | महत् + बल
द्रोणस्तु समरे वीरं निर्दहन्तं सुतांस्तव यथाद्रिं वारिधाराभिः समन्ताद्व्यकिरच्छरैः
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द्रोण + तु | समरे | वीरं | निर्दहन्तं | सुत + त्वद्
यथा + अद्रि | वारि + धारा | समन्ताद् | विकृ + शर
तत्राद्भुतमपश्याम कुन्तीपुत्रस्य पौरुषम् द्रोणेन वार्यमाणोऽपि निजघ्ने यत्सुतांस्तव
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अति + अद्भुत | अपश्याम | शक्र + इव | पराक्रमम्
द्रोणेन | वार्यमाणो | ऽपि | निजघ्ने | यत् | सुत + त्वद्
यथा हि गोवृषो वर्षं संधारयति खात्पतत् भीमस्तथा द्रोणमुक्तं शरवर्षमदीधरत्
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यथा | हि | गो + वृष | वर्षं | संधारयति | खात् | पतत्
भीम + तथा | द्रोण + मुच् | शर + वर्ष | अदीधरत्
अद्भुतं महाराज तत्र चक्रे वृकोदरः यत्पुत्रांस्तेऽवधीत्संख्ये द्रोणं चैव न्ययोधयत्
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अद्भुतं | च | महत् + राज | तत्र | चक्रे | वृकोदरः
यत् | पुत्र + त्वद् | ऽवधीत् | संख्ये | द्रोणं | च + एव | न्ययोधयत्
पुत्रेषु तव वीरेषु चिक्रीडार्जुनपूर्वजः मृगेष्विव महाराज चरन्व्याघ्रो महाबलः
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पुत्रेषु | तव | वीरेषु | क्रीड् + अर्जुन + पूर्वज
मृग + इव | महत् + राज | चरन् | व्याघ्रो | महत् + बल
यथा वा पशुमध्यस्थो द्रावयेत पशून्वृकः वृकोदरस्तव सुतांस्तथा व्यद्रावयद्रणे
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यथा | वा | पशु + मध्य + स्थ | द्रावयेत | पशून् | वृकः
वृकोदर + त्वद् | सुत + तथा | व्यद्रावयद् | रणे
गाङ्गेयो भगदत्तश्च गौतमश्च महारथः पाण्डवं रभसं युद्धे वारयामासुरर्जुनम्
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शृङ्गेभ्यो | भीमसेन + च | सात्यकि + च | महत् + रथ
पाण्डवं | रभसं | युद्धे | वारयामासुर् | अर्जुनम्
अस्त्रैरस्त्राणि संवार्य तेषां सोऽतिरथो रणे प्रवीरांस्तव सैन्येषु प्रेषयामास मृत्यवे
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अस्त्रैर् | अस्त्राणि | संवार्य | तेषां | सो | ऽतिरथो | रणे
गज + अनीक | समासाद्य | प्रेषयामास | मृत्यवे
अभिमन्युश्च राजानमम्बष्ठं लोकविश्रुतम् विरथं रथिनां श्रेष्ठं कारयामास सायकैः
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अभिमन्यु + च | राजानम् | अम्बष्ठं | लोक + विश्रु
शिरांसि | रथिनां | भीष्मः | पातयामास | संयुगे
विरथो वध्यमानः सौभद्रेण यशस्विना अवप्लुत्य रथात्तूर्णं सव्रीडो मनुजाधिपः
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विरथो | वध्यमानः | स | सौभद्रेण | यशस्विना
अवप्लु + अथ | पाञ्चाल्यो | रथात् | तूर्णं | महत् + बल
असिं चिक्षेप समरे सौभद्रस्य महात्मनः आरुरोह रथं चैव हार्दिक्यस्य महात्मनः
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असिं | चिक्षेप | समरे | सौभद्रस्य | महात्मनः
आरुरोह | रथं | तूर्णं | नकुलस्य | महात्मनः
आपतन्तं तु निस्त्रिंशं युद्धमार्गविशारदः लाघवाद्व्यंसयामास सौभद्रः परवीरहा
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आपतन्तं | तु | निस्त्रिंशं | युद्ध + मार्ग + विशारद
लाघवाद् | व्यंसयामास | सौभद्रः | पर + वीर + हन्
व्यंसितं वीक्ष्य निस्त्रिंशं सौभद्रेण रणे तदा साधु साध्विति सैन्यानां प्रणादोऽभूद्विशां पते
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व्यंसितं | वीक्ष्य | निस्त्रिंशं | सौभद्रेण | रणे | तदा
साधु | साधु + इति | सैन्यानि | पाण्डवेय + पूजय्
धृष्टद्युम्नमुखास्त्वन्ये तव सैन्यमयोधयन् तथैव तावकाः सर्वे पाण्डुसैन्यमयोधयन्
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धृष्टद्युम्न + मुख + तु + अन्य | तव | सैन्यम् | अयोधयन्
तथा + एव | तावकाः | सर्वे | पाण्डु + सैन्य | अयोधयन्
तत्राक्रन्दो महानासीत्तव तेषां भारत निघ्नतां भृशमन्योन्यं कुर्वतां कर्म दुष्करम्
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तत्र + आक्रन्द | महान् | आसीत् | तावकानां | महात्मनाम्
युध्यतां | तु | तथा | तेषां | कुर्वतां | कर्म | दुष्करम्
अन्योन्यं हि रणे शूराः केशेष्वाक्षिप्य मारिष नखैर्दन्तैरयुध्यन्त मुष्टिभिर्जानुभिस्तथा
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अन्योन्यं | हि | रणे | शूराः | केश + आक्षिप् | मारिष
नखैर् | दन्तैर् | अयुध्यन्त | मुष्टिभिर् | जानु + तथा
बाहुभिश्च तलैश्चैव निस्त्रिंशैश्च सुसंशितैः विवरं प्राप्य चान्योन्यमनयन्यमसादनम्
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बाहु + च | तल + च + एव | निस्त्रिंश + च | सु + संशा
विवरं | प्राप्य | च + अन्योन्य | अनयन् | यम + सादन
न्यहनच्च पिता पुत्रं पुत्रश्च पितरं रणे व्याकुलीकृतसंकल्पा युयुधुस्तत्र मानवाः
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पिता | पुत्रं | न | जानीते | पुत्रो | वा | पितरं | तथा
व्याकुलीकृ + संकल्प | युध् + तत्र | मानवाः
रणे चारूणि चापानि हेमपृष्ठानि भारत हतानामपविद्धानि कलापाश्च महाधनाः
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रणे | चारूणि | चापानि | हेमन् + पृष्ठ | भारत
हतानाम् | अपविद्धानि | कलाप + च | महाधनाः
जातरूपमयैः पुङ्खै राजतैश्च शिताः शराः तैलधौता व्यराजन्त निर्मुक्तभुजगोपमाः
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जातरूप + मय | पुङ्खै | राजत + च | शिताः | शराः
तैल + धाव् | व्यराजन्त | निर्मुच् + भुजग + उपम
हस्तिदन्तत्सरून्खड्गाञ्जातरूपपरिष्कृतान् चर्माणि चापविद्धानि रुक्मपृष्ठानि धन्विनाम्
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हस्तिन् + दन्त + त्सरु | खड्गाञ् | जातरूप + परिष्कृ
रणे | चारूणि | चापानि | हेमन् + पृष्ठ | भारत
सुवर्णविकृतप्रासान्पट्टिशान्हेमभूषितान् जातरूपमयाश्चर्ष्टीः शक्त्यश्च कनकोज्ज्वलाः
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सुवर्ण + विकृ + प्रास | पट्टिशान् | हेमन् + भूषय्
जातरूप + मय + च + ऋष्टि | शक्ति + च | कनक + उज्ज्वल
अपकृत्ताश्च पतिता मुसलानि गुरूणि परिघान्पट्टिशांश्चैव भिण्डिपालांश्च मारिष
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अपकृत् + च | पतिता | मुसलानि | गुरूणि | च
परिघान् | पट्टिश + च + एव | भिन्दिपाल + च | मारिष
पतितांस्तोमरांश्चापि चित्रा हेमपरिष्कृताः कुथाश्च बहुधाकाराश्चामरव्यजनानि
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पत् + तोमर + च + अपि | चित्रा | हेमन् + परिष्कृ
कुथ + च | बहुधा + आकार + चामर + व्यजन | च
नानाविधानि शस्त्राणि विसृज्य पतिता नराः जीवन्त इव दृश्यन्ते गतसत्त्वा महारथाः
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नाना + रूप | शस्त्राणि | विसृजन्तो | महत् + रथ
जीवन्त | इव | दृश्यन्ते | गम् + सत्त्व | महत् + रथ
गदाविमथितैर्गात्रैर्मुसलैर्भिन्नमस्तकाः गजवाजिरथक्षुण्णाः शेरते स्म नराः क्षितौ
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गदा + विमथ् | गात्रैर् | मुसलैर् | भिद् + मस्तक
गज + वाजिन् + रथ + क्षुद् | शेरते | स्म | नराः | क्षितौ
तथैवाश्वनृनागानां शरीरैराबभौ तदा संछन्ना वसुधा राजन्पर्वतैरिव सर्वतः
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तथा + एव + अश्व + नृ + नाग | शरीरैर् | आबभौ | तदा
संछन्ना | वसुधा | राजन् | पर्वतैर् | इव | सर्वतः
समरे पतितैश्चैव शक्त्यृष्टिशरतोमरैः निस्त्रिंशैः पट्टिशैः प्रासैरयस्कुन्तैः परश्वधैः
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समरे | पत् + च + एव | शक्ति + ऋष्टि + शर + तोमर
निस्त्रिंशैः | पट्टिशैः | प्रासैर् | परश्वधैः
परिघैर्भिण्डिपालैश्च शतघ्नीभिस्तथैव शरीरैः शस्त्रभिन्नैश्च समास्तीर्यत मेदिनी
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परिघैर् | भिन्दिपाल + च | शतघ्नी + तथा + एव | च
पत् + च | हयै | राजन् | समास्तीर्यत | मेदिनी
निःशब्दैरल्पशब्दैश्च शोणितौघपरिप्लुतैः गतासुभिरमित्रघ्न विबभौ संवृता मही
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निःशब्दैर् | अल्प + शब्द + च | शोणित + ओघ + परिप्लु
गतासुभिर् | अमित्र + घ्न | विबभौ | संवृता | मही
सतलत्रैः सकेयूरैर्बाहुभिश्चन्दनोक्षितैः हस्तिहस्तोपमैश्छिन्नैरूरुभिश्च तरस्विनाम्
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स + तलत्र | स + केयूर | बाहु + चन्दन + उक्ष्
हस्तिन् + हस्त + उपम + छिद् | ऊरु + च | तरस्विनाम्
बद्धचूडामणिधरैः शिरोभिश्च सकुण्डलैः पतितैर्वृषभाक्षाणां बभौ भारत मेदिनी
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हारैर् | निष्कैः | स + केयूर | शिरस् + च | स + कुण्डल
पतितैर् | वृषभ + अक्ष | बभौ | भारत | मेदिनी
कवचैः शोणितादिग्धैर्विप्रकीर्णैश्च काञ्चनैः रराज सुभृशं भूमिः शान्तार्चिभिरिवानलैः
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कवचैः | शोणित + आदिह् | विप्रकृ + च | काञ्चनैः
रराज | सु + भृशम् | भूमिः | शम् + अर्चि | इव + अनल
विप्रविद्धैः कलापैश्च पतितैश्च शरासनैः विप्रकीर्णैः शरैश्चापि रुक्मपुङ्खैः समन्ततः
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विप्रविद्धैः | कलाप + च | पत् + च | शरासनैः
विप्रकीर्णैः | शर + च + अपि | रुक्म + पुङ्ख | समन्ततः
रथैश्च बहुभिर्भग्नैः किङ्किणीजालमालिभिः वाजिभिश्च हतैः कीर्णैः स्रस्तजिह्वैः सशोणितैः
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रथ + च | बहुभिर् | भग्नैः | किङ्किणी + जाल + मालिन्
वाजिन् + च | हतैः | कीर्णैः | स्रंस् + जिह्वा | स + शोणित
अनुकर्षैः पताकाभिरुपासङ्गैर्ध्वजैरपि प्रवीराणां महाशङ्खैर्विप्रकीर्णैश्च पाण्डुरैः
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अनुकर्षैः | पताकाभिर् | उपासङ्गैर् | ध्वजैर् | अपि
प्रवीराणां | महाशङ्खैर् | विप्रकृ + च | पाण्डुरैः
स्रस्तहस्तैश्च मातङ्गैः शयानैर्विबभौ मही नानारूपैरलंकारैः प्रमदेवाभ्यलंकृता
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स्रंस् + हस्त + च | मातङ्गैः | शयानैर् | विबभौ | मही
नाना + रूप | अलंकारैः | प्रमदा + इव + अभ्यलंकृ
दन्तिभिश्चापरैस्तत्र सप्रासैर्गाढवेदनैः करैः शब्दं विमुञ्चद्भिः शीकरं मुहुर्मुहुः विबभौ तद्रणस्थानं धम्यमानैरिवाचलैः
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दन्तिन् + च + अपर + तत्र | स + प्रास | गाढ + वेदना
करैः | शब्दं | विमुञ्चद्भिः | शीकरं | च | मुहुर् | मुहुः
विबभौ | तद् | रण + स्थान | धम्यमानैर् | इव + अचल
नानारागैः कम्बलैश्च परिस्तोमैश्च दन्तिनाम् वैडूर्यमणिदण्डैश्च पतितैरङ्कुशैः शुभैः
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नाना + राग | कम्बल + च | परिस्तोम + च | दन्तिनाम्
वैडूर्य + मणि + दण्ड + च | पतितैर् | अङ्कुशैः | शुभैः
घण्टाभिश्च गजेन्द्राणां पतिताभिः समन्ततः विघाटितविचित्राभिः कुथाभी राङ्कवैस्तथा
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घण्टा + च | गज + इन्द्र | पतिताभिः | समन्ततः
विघाटय् + विचित्र | कुथाभी | राङ्कव + तथा
ग्रैवेयैश्चित्ररूपैश्च रुक्मकक्ष्याभिरेव यन्त्रैश्च बहुधा छिन्नैस्तोमरैश्च सकम्पनैः
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ग्रैवेय + चित्र + रूप + च | रुक्म + कक्ष्या | एव | च
यन्त्र + च | बहुधा | छिद् + तोमर + च | स + कम्पन
अश्वानां रेणुकपिलै रुक्मच्छन्नैरुरश्छदैः सादिनां भुजैश्छिन्नैः पतितैः साङ्गदैस्तथा
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अश्वानां | रेणु + कपिल | रुक्म + छद् | उरश्छदैः
सादिनां | च | भुज + छिद् | पतितैः | स + अङ्गद + तथा
प्रासैश्च विमलैस्तीक्ष्णैर्विमलाभिस्तथर्ष्टिभिः उष्णीषैश्च तथा छिन्नैः प्रविद्धैश्च ततस्ततः
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प्रास + च | विमल + तीक्ष्ण | विमल + तथा + ऋष्टि
उष्णीष + च | तथा | छिन्नैः | प्रव्यध् + च | ततस्
विचित्रैरर्धचन्द्रैश्च जातरूपपरिष्कृतैः अश्वास्तरपरिस्तोमै राङ्कवैर्मृदितैस्तथा
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विचित्रैर् | अर्धचन्द्र + च | जातरूप + परिष्कृ
अश्व + आस्तर + परिस्तोम | राङ्कवैर् | मृद् + तथा
नरेन्द्रचूडामणिभिर्विचित्रैश्च महाधनैः छत्रैस्तथापविद्धैश्च चामरव्यजनैरपि
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नरेन्द्र + चूडामणि | विचित्र + च | महाधनैः
छत्त्र + तथा + अपव्यध् + च | चामर + व्यजन | अपि
पद्मेन्दुद्युतिभिश्चैव वदनैश्चारुकुण्डलैः कॢप्तश्मश्रुभिरत्यर्थं वीराणां समलंकृतैः
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पद्म + इन्दु + द्युति + च + एव | वदन + चारु + कुण्डल
क्ᄆप् + श्मश्रु | अत्यर्थं | वीराणां | समलंकृतैः
अपविद्धैर्महाराज सुवर्णोज्ज्वलकुण्डलैः ग्रहनक्षत्रशबला द्यौरिवासीद्वसुंधरा
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अपविद्धैर् | महत् + राज | सुवर्ण + उज्ज्वल + कुण्डल
ग्रह + नक्षत्र + शबल | द्यौर् | इव + अस् | वसुंधरा
एवमेते महासेने मृदिते तत्र भारत परस्परं समासाद्य तव तेषां संयुगे
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एवम् | एते | महत् + सेना | मृदिते | तत्र | भारत
स | हि | भीष्मं | समासाद्य | ताडयामास | संयुगे
तेषु श्रान्तेषु भग्नेषु मृदितेषु भारत रात्रिः समभवद्घोरा नापश्याम ततो रणम्
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तेषु | प्रक्षीयमाणेषु | भग्नेषु | गज + योधिन्
रात्रिः | समभवद् | घोरा | न + पश् | ततो | रणम्
ततोऽवहारं सैन्यानां प्रचक्रुः कुरुपाण्डवाः घोरे निशामुखे रौद्रे वर्तमाने सुदारुणे
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ततो | ऽवहारं | सैन्यानां | प्रचक्रुः | कुरु + पाण्डव
तद् + तु | तुमुले | युद्धे | वर्तमाने | सु + दारुण
अवहारं ततः कृत्वा सहिताः कुरुपाण्डवाः न्यविशन्त यथाकालं गत्वा स्वशिबिरं तदा
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अवहारं | ततः | कृत्वा | सहिताः | कुरु + पाण्डव
न्यविशन्त | यथाकालं | गत्वा | स्व + शिबिर | तदा