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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.82
(56 verses)
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Sanskrit Text
रणे
भरतसिंहस्य
ददृशुः
क्षत्रिया
गतिम्
।
अग्नेर्वायुसहायस्य
यथा
कक्षं
दिधक्षतः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
रणे | भरत + सिंह | ददृशुः | क्षत्रिया | गतिम्
अग्नेर् | वायु + सहाय | यथा | कक्षं | दिधक्षतः
अग्नेर् | वायु + सहाय | यथा | कक्षं | दिधक्षतः