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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.81
(37 verses)
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Sanskrit Text
तेषां
रथानामथ
पृष्ठगोपा;
द्वात्रिंशदन्येऽब्यपतन्त
पार्थम्
।
तथैव
ते
संपरिवार्य
पार्थं;
विकृष्य
चापानि
महारवाणि
।
अवीवृषन्बाणमहौघवृष्ट्या;
यथा
गिरिं
तोयधरा
जलौघैः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तेषां | रथानाम् | अथ | पृष्ठगोपा | द्वात्रिंशद् | अन्ये | ऽभ्यपतन्त | पार्थम्
तथा + एव | ते | संपरिवार्य | पार्थं | विकृष्य | चापानि | महत् + रव
अवीवृषन् | बाण + महत् + ओघ + वृष्टि | यथा | गिरिं | तोयधरा | जल + ओघ
तथा + एव | ते | संपरिवार्य | पार्थं | विकृष्य | चापानि | महत् + रव
अवीवृषन् | बाण + महत् + ओघ + वृष्टि | यथा | गिरिं | तोयधरा | जल + ओघ