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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.81
(37 verses)
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Sanskrit Text
गदापि
सा
प्राप्य
रथं
सुचित्रं;
साश्वं
ससूतं
विनिहत्य
संख्ये
।
जगाम
भूमिं
ज्वलिता
महोल्का;
भ्रष्टाम्बराद्गामिव
संपतन्ती
॥
Padaccheda (Word Analysis)
गदा + अपि | सा | प्राप्य | रथं | सु + चित्र | स + अश्व | स + सूत | विनिहत्य | संख्ये
जगाम | भूमिं | ज्वलिता | महत् + उल्का | भ्रंश् + अम्बर | गाम् | इव | संपतन्ती
जगाम | भूमिं | ज्वलिता | महत् + उल्का | भ्रंश् + अम्बर | गाम् | इव | संपतन्ती