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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.81
(37 verses)
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Sanskrit Text
आज्ञायमानेऽपि
धनंजयेन;
महाहवे
संप्रसक्ते
नृवीर
।
कथं
हि
भीष्मात्प्रथितः
पृथिव्यां;
भयं
त्वमद्य
प्रकरोषि
वीर
॥
Padaccheda (Word Analysis)
आज्ञायमाने | ऽपि | धनंजयेन | महत् + आहव | सम्प्रसक्ते | नृ + वीर
कथं | हि | भीष्मात् | प्रथितः | पृथिव्यां | भयं | त्वम् | अद्य | प्रकरोषि | वीर
कथं | हि | भीष्मात् | प्रथितः | पृथिव्यां | भयं | त्वम् | अद्य | प्रकरोषि | वीर