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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.81
(37 verses)
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Sanskrit Text
निकृत्तचापः
समरानपेक्षः;
पराजितः
शांतनवेन
राज्ञा
।
विहाय
बन्धूनथ
सोदरांश्च;
क्व
यास्यसे
नानुरूपं
तवेदम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
निकृत् + चाप | समर + अनपेक्ष | पराजितः | शांतनवेन | राज्ञा
विहाय | बन्धून् | अथ | सोदर + च | क्व | यास्यसे | न + अनुरूप | त्वद् + इदम्
विहाय | बन्धून् | अथ | सोदर + च | क्व | यास्यसे | न + अनुरूप | त्वद् + इदम्