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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.81
(37 verses)
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Sanskrit Text
आवारयिष्णूनभिसंप्रयाय;
मुहूर्तमायोध्य
बलेन
वीरः
।
उत्सृज्य
राजानमनन्तवीर्यो;
जयद्रथादींश्च
नृपान्महौजाः
।
ययौ
ततो
भीमबलो
मनस्वी;
गाङ्गेयमाजौ
शरचापपाणिः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
आवारयिष्णून् | अभिसम्प्रयाय | मुहूर्तम् | आयोध्य | बलेन | वीरः
उत्सृज्य | राजानम् | अनन्त + वीर्य | जयद्रथ + आदि + च | नृप + महत् + ओजस्
ययौ | ततो | भीम + बल | मनस्वी | गाङ्गेयम् | आजौ | शर + चाप + पाणि
उत्सृज्य | राजानम् | अनन्त + वीर्य | जयद्रथ + आदि + च | नृप + महत् + ओजस्
ययौ | ततो | भीम + बल | मनस्वी | गाङ्गेयम् | आजौ | शर + चाप + पाणि