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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.48
(70 verses)
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Sanskrit Text
स
तथा
कुरु
गाङ्गेय
यथा
हन्येत
फल्गुनः
।
एवमुक्तस्ततो
राजन्पिता
देवव्रतस्तव
।
धिक्क्षत्रधर्ममित्युक्त्वा
ययौ
पार्थरथं
प्रति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | तथा | कुरु | गाङ्गेय | यथा | हन्येत | फल्गुनः
एवम् | वच् + ततस् | राजन् | पिता | देवव्रत + त्वद्
धिक् | क्षत्र + धर्म | इति + वच् | ययौ | पार्थ + रथ | प्रति
एवम् | वच् + ततस् | राजन् | पिता | देवव्रत + त्वद्
धिक् | क्षत्र + धर्म | इति + वच् | ययौ | पार्थ + रथ | प्रति