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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.48
(70 verses)
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Sanskrit Text
एष
पाण्डुसुतस्तात
कृष्णेन
सहितो
बली
।
यततां
सर्वसैन्यानां
मूलं
नः
परिकृन्तति
।
त्वयि
जीवति
गाङ्गेये
द्रोणे
च
रथिनां
वरे
॥
Padaccheda (Word Analysis)
एष | पाण्डु + सुत + तात | कृष्णेन | सहितो | बली
यततां | सर्व + सैन्य | मूलं | नः | परिकृन्तति
त्वयि | जीवति | गाङ्गेये | द्रोणे | च | रथिनां | वरे
यततां | सर्व + सैन्य | मूलं | नः | परिकृन्तति
त्वयि | जीवति | गाङ्गेये | द्रोणे | च | रथिनां | वरे