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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.112
(138 verses)
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Sanskrit Text
स
समन्तात्परिवृतो
भारतो
भरतर्षभ
।
निर्ददाह
रणे
शूरान्वनं
वह्निरिव
ज्वलन्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | समन्तात् | परिवृतो | भारतो | भरत + ऋषभ
निर्ददाह | रणे | शूरान् | वनं | वह्निर् | इव | ज्वलन्
निर्ददाह | रणे | शूरान् | वनं | वह्निर् | इव | ज्वलन्