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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.102
(78 verses)
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Sanskrit Text
स
समन्तात्परिवृतो
रथौघैरपराजितः
।
गहनेऽग्निरिवोत्सृष्टः
प्रजज्वाल
दहन्परान्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स | समन्तात् | परिवृतो | रथ + ओघ | अपराजितः
गहने | ऽग्निर् | इव + उत्सृज् | प्रजज्वाल | दहन् | परान्
गहने | ऽग्निर् | इव + उत्सृज् | प्रजज्वाल | दहन् | परान्