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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.102
(78 verses)
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Sanskrit Text
विमृद्नतस्तस्य
तु
पाण्डुसेना;मस्तं
जगामाथ
सहस्ररश्मिः
।
ततो
बलानां
श्रमकर्शितानां;
मनोऽवहारं
प्रति
संबभूव
॥
Padaccheda (Word Analysis)
विमृद् + तद् | तु | पाण्डु + सेना | अस्तं | गम् + अथ | सहस्ररश्मिः
ततो | बलानां | श्रम + कर्शय् | मनो | ऽवहारं | प्रति | संबभूव
ततो | बलानां | श्रम + कर्शय् | मनो | ऽवहारं | प्रति | संबभूव