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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.102
(78 verses)
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Sanskrit Text
त्रातारं
नाध्यगच्छन्त
गावः
पङ्कगता
इव
।
पिपीलिका
इव
क्षुण्णा
दुर्बला
बलिना
रणे
॥
Padaccheda (Word Analysis)
त्रातारं | न + अधिगम् | पङ्के | मग्ना | इव | द्विपाः
पिपीलिका | इव | क्षुण्णा | दुर्बला | बलिना | रणे
पिपीलिका | इव | क्षुण्णा | दुर्बला | बलिना | रणे