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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.102
(78 verses)
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Sanskrit Text
हतविद्रुतसैन्यास्तु
निरुत्साहा
विचेतसः
।
निरीक्षितुं
न
शेकुस्ते
भीष्ममप्रतिमं
रणे
।
मध्यं
गतमिवादित्यं
प्रतपन्तं
स्वतेजसा
॥
Padaccheda (Word Analysis)
हन् + विद्रु + सैन्य + तु | निरुत्साहा | विचेतसः
निरीक्षितुं | न | शक् + तद् | भीष्मम् | अप्रतिमं | रणे
मध्यं | गतम् | इव + आदित्य | प्रतपन्तं | स्व + तेजस्
निरीक्षितुं | न | शक् + तद् | भीष्मम् | अप्रतिमं | रणे
मध्यं | गतम् | इव + आदित्य | प्रतपन्तं | स्व + तेजस्