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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.102
(78 verses)
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Sanskrit Text
शपे
माधव
सख्येन
सत्येन
सुकृतेन
च
।
अन्तं
यथा
गमिष्यामि
शत्रूणां
शत्रुकर्शन
॥
Padaccheda (Word Analysis)
शपे | माधव | सख्येन | सत्येन | सुकृतेन | च
अन्तं | यथा | गमिष्यामि | शत्रूणां | शत्रु + कर्शन
अन्तं | यथा | गमिष्यामि | शत्रूणां | शत्रु + कर्शन