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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.102
(78 verses)
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Sanskrit Text
त्वया
हि
देव
संग्रामे
हतस्यापि
ममानघ
।
श्रेय
एव
परं
कृष्ण
लोकेऽमुष्मिन्निहैव
च
।
संभावितोऽस्मि
गोविन्द
त्रैलोक्येनाद्य
संयुगे
॥
Padaccheda (Word Analysis)
त्वया | हि | देव | संग्रामे | हन् + अपि | मद् + अनघ
श्रेय | एव | परं | कृष्ण | लोके | ऽमुष्मिन्न् | इह + एव | च
संभावितो | ऽस्मि | गोविन्द | त्रैलोक्य + अद्य | संयुगे
श्रेय | एव | परं | कृष्ण | लोके | ऽमुष्मिन्न् | इह + एव | च
संभावितो | ऽस्मि | गोविन्द | त्रैलोक्य + अद्य | संयुगे