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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.102
(78 verses)
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Sanskrit Text
प्रतोदपाणिस्तेजस्वी
सिंहवद्विनदन्मुहुः
।
दारयन्निव
पद्भ्यां
स
जगतीं
जगतीश्वरः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सौभद्रो | ऽपि | रणे | राजन् | सिंह + वत् | विनद् + मुहुर्
दारयन्न् | इव | पद्भ्यां | स | जगतीं | जगती + ईश्वर
दारयन्न् | इव | पद्भ्यां | स | जगतीं | जगती + ईश्वर