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Currently viewing: Parva 6 -
Chapter 6.101
(33 verses)
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Sanskrit Text
वेगवद्भिर्हयैस्तैस्तु
क्षोभितं
पाण्डवं
बलम्
।
निपतद्भिर्महावेगैर्हंसैरिव
महत्सरः
।
हेषतां
चैव
शब्देन
न
प्राज्ञायत
किंचन
॥
Padaccheda (Word Analysis)
वेगवद्भिर् | हय + तद् + तु | क्षोभितं | पाण्डवं | बलम्
निपतद्भिर् | महत् + वेग | हंसैर् | इव | महत् | सरः
हेषतां | च + एव | शब्देन | न | प्राज्ञायत | किंचन
निपतद्भिर् | महत् + वेग | हंसैर् | इव | महत् | सरः
हेषतां | च + एव | शब्देन | न | प्राज्ञायत | किंचन