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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.160
(29 verses)
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Sanskrit Text
भावस्ते
विदितोऽस्माभिर्दुर्बुद्धे
कुलपांसन
।
न
हनिष्यन्ति
गङ्गेयं
पाण्डवा
घृणयेति
च
॥
Padaccheda (Word Analysis)
भाव + त्वद् | विदितो | ऽस्माभिर् | दुर्बुद्धे | कुल + पांसन
वरान् | वरान् | हनिष्यन्ति | समेता | युधि | पाण्डवाः
वरान् | वरान् | हनिष्यन्ति | समेता | युधि | पाण्डवाः