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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.160
(29 verses)
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Sanskrit Text
अधर्मज्ञो
नित्यवैरी
पापबुद्धिर्नृशंसकृत्
।
सत्यां
प्रतिज्ञां
नचिराद्रक्ष्यसे
तां
सुयोधन
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अधर्म + ज्ञ | नित्य + वैरिन् | पाप + बुद्धि | नृशंस + कृत्
सत्यां | प्रतिज्ञां | नचिराद् | रक्ष्यसे | तां | सुयोधन
सत्यां | प्रतिज्ञां | नचिराद् | रक्ष्यसे | तां | सुयोधन