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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.145
(40 verses)
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Sanskrit Text
त्वया
नागपुरं
गत्वा
सभायां
धृतराष्ट्रजः
।
किमुक्तः
पुण्डरीकाक्ष
तन्नः
शंसितुमर्हसि
॥
Padaccheda (Word Analysis)
त्वया | नागपुरं | गत्वा | सभायां | धृतराष्ट्र + ज
किम् | उक्तः | पुण्डरीकाक्ष | तद् + मद् | शंसितुम् | अर्हसि
किम् | उक्तः | पुण्डरीकाक्ष | तद् + मद् | शंसितुम् | अर्हसि