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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.145
(40 verses)
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Sanskrit Text
संध्यामुपास्य
ध्यायन्तस्तमेव
गतमानसाः
।
आनाय्य
कृष्णं
दाशार्हं
पुनर्मन्त्रममन्त्रयन्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
संध्याम् | उपास्य | ध्या + तद् | एव | गम् + मानस
आनाय्य | कृष्णं | दाशार्हं | पुनर् | मन्त्रम् | अमन्त्रयन्
आनाय्य | कृष्णं | दाशार्हं | पुनर् | मन्त्रम् | अमन्त्रयन्