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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.145
(40 verses)
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Sanskrit Text
अन्धः
करणहीनेति
न
वै
राजा
पिता
तव
।
राजा
तु
पाण्डुरभवन्महात्मा
लोकविश्रुतः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अन्धः | करण + हा + इति | न | वै | राजा | पिता | तव
राजा | तु | पाण्डुर् | भू + महात्मन् | लोक + विश्रु
राजा | तु | पाण्डुर् | भू + महात्मन् | लोक + विश्रु