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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.145
(40 verses)
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Sanskrit Text
व्याधीन्प्रणुद्य
वीर
त्वं
प्रजा
धर्मेण
पालय
।
त्वयि
जीवति
मा
राष्ट्रं
विनाशमुपगच्छतु
॥
Padaccheda (Word Analysis)
स्व + राज्य | च + वस् | प्रीतः | प्रजा | धर्मेण | पालयन्
त्वयि | जीवति | मा | राष्ट्रं | विनाशम् | उपगच्छतु
त्वयि | जीवति | मा | राष्ट्रं | विनाशम् | उपगच्छतु