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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.145
(40 verses)
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Sanskrit Text
यथा
च
नाभिपद्येत
कालस्तात
तथा
कुरु
।
भवान्हि
नो
गतिः
कृष्ण
भवान्नाथो
भवान्गुरुः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
यथा | च | न + अभिपद् | काल + तात | तथा | कुरु
भवान् | हि | नो | गतिः | कृष्ण | भवत् + नाथ | भवान् | गुरुः
भवान् | हि | नो | गतिः | कृष्ण | भवत् + नाथ | भवान् | गुरुः