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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.137
(22 verses)
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Sanskrit Text
मिथ्योपचरिता
ह्येते
वर्तमाना
ह्यनु
प्रिये
।
अहितत्वाय
कल्पन्ते
दोषा
भरतसत्तम
॥
Padaccheda (Word Analysis)
मिथ्या + उपचर् | हि + एतद् | वर्तमाना | हि + अनु | प्रिये
न | हि | त्वाम् | उत्सहे | वक्तुं | भूयो | भरत + सत्तम
न | हि | त्वाम् | उत्सहे | वक्तुं | भूयो | भरत + सत्तम