Verse 1
View Details
एवमुक्तस्तु
विमनास्तिर्यग्दृष्टिरधोमुखः
।
संहत्य
च
भ्रुवोर्मध्यं
न
किंचिद्व्याजहार
ह
॥
View Padaccheda
एवम् | वच् + तु | विमनस् + तिर्यञ्च् + दृष्टि | अधोमुखः
दुःख + आर्त | भरत + श्रेष्ठ | न | किंचिद् | व्याजहार | ह
दुःख + आर्त | भरत + श्रेष्ठ | न | किंचिद् | व्याजहार | ह