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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.137
(22 verses)
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Sanskrit Text
शुश्रूषुमनसूयं
च
ब्रह्मण्यं
सत्यसंगरम्
।
प्रतियोत्स्यामहे
पार्थमतो
दुःखतरं
नु
किम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
शुश्रूषुम् | अनसूयं | च | ब्रह्मण्यं | सत्य + संगर
प्रतियोत्स्यामहे | पार्थम् | अतो | दुःखतरं | नु | किम्
प्रतियोत्स्यामहे | पार्थम् | अतो | दुःखतरं | नु | किम्