Navigate to Verse
Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.137
(22 verses)
Powered by Aksharamukha
Search Mahābhārata
❖ ❖ ❖
Sanskrit Text
कुबेरसदनं
प्राप्य
ततो
रत्नान्यवाप्य
च
।
स्फीतमाक्रम्य
ते
राष्ट्रं
राज्यमिच्छन्ति
पाण्डवाः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
कुबेर + सदन | प्राप्य | ततो | रत्न + अवाप् | च
स्फीतम् | आक्रम्य | ते | राष्ट्रं | राज्यम् | इच्छन्ति | पाण्डवाः
स्फीतम् | आक्रम्य | ते | राष्ट्रं | राज्यम् | इच्छन्ति | पाण्डवाः