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Currently viewing: Parva 5 -
Chapter 5.123
(27 verses)
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Sanskrit Text
अथ
द्रोणोऽब्रवीत्तत्र
दुर्योधनमिदं
वचः
।
अमर्षवशमापन्नं
निःश्वसन्तं
पुनः
पुनः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अथ | द्रोणो | ऽब्रवीत् | तत्र | दुर्योधनम् | इदं | वचः
सा | बाष्प + कल | वाचा | निःश्वसन्ती | पुनः | पुनः
सा | बाष्प + कल | वाचा | निःश्वसन्ती | पुनः | पुनः