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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.86
(24 verses)
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Sanskrit Text
राजर्षेस्तत्र
च
सरिन्नृगस्य
भरतर्षभ
।
रम्यतीर्था
बहुजला
पयोष्णी
द्विजसेविता
॥
Padaccheda (Word Analysis)
राजन् + ऋषि | तत्र | च | सरित् + नृग | भरत + ऋषभ
रम्य + तीर्थ | बहु + जल | पयोष्णी | द्विज + सेव्
रम्य + तीर्थ | बहु + जल | पयोष्णी | द्विज + सेव्