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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.86
(24 verses)
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Sanskrit Text
तत्र
पिण्डारकं
नाम
तापसाचरितं
शुभम्
।
उज्जयन्तश्च
शिखरी
क्षिप्रं
सिद्धिकरो
महान्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
तत्र | पिण्डारकं | नाम | तापस + आचर् | शुभम्
उज्जयन्तश् | च | शिखरी | क्षिप्रं | सिद्धि + कर | महान्
उज्जयन्तश् | च | शिखरी | क्षिप्रं | सिद्धि + कर | महान्