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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.68
(24 verses)
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Sanskrit Text
विषमस्थेन
मूढेन
परिभ्रष्टसुखेन
च
।
यत्सा
तेन
परित्यक्ता
तत्र
न
क्रोद्धुमर्हति
॥
Padaccheda (Word Analysis)
विषम + स्थ | मूढेन | परिभ्रंश् + सुख | च
यत् | सा | तेन | परित्यक्ता | तत्र | न | क्रोद्धुम् | अर्हति
यत् | सा | तेन | परित्यक्ता | तत्र | न | क्रोद्धुम् | अर्हति