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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.65
(37 verses)
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Sanskrit Text
सुकुमारीं
सुजाताङ्गीं
रत्नगर्भगृहोचिताम्
।
दह्यमानामिवोष्णेन
मृणालीमचिरोद्धृताम्
॥
Padaccheda (Word Analysis)
सुकुमारीं | सुजात + अङ्ग | रत्न + गर्भ + गृह + उचित
दह्यमानाम् | इव + उष्ण | मृणालीम् | अचिर + उद्धृ
दह्यमानाम् | इव + उष्ण | मृणालीम् | अचिर + उद्धृ