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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.63
(24 verses)
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Sanskrit Text
गच्छ
राजन्नितः
सूतो
बाहुकोऽहमिति
ब्रुवन्
।
समीपमृतुपर्णस्य
स
हि
वेदाक्षनैपुणम्
।
अयोध्यां
नगरीं
रम्यामद्यैव
निषधेश्वर
॥
Padaccheda (Word Analysis)
गच्छ | राजन्न् | इतः | सूतो | बाहुको | ऽहम् | इति | ब्रुवन्
समीपम् | ऋतुपर्णस्य | स | हि | विद् + अक्ष + नैपुण
अयोध्यां | नगरीं | रम्याम् | अद्य + एव | निषध + ईश्वर
समीपम् | ऋतुपर्णस्य | स | हि | विद् + अक्ष + नैपुण
अयोध्यां | नगरीं | रम्याम् | अद्य + एव | निषध + ईश्वर