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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.62
(43 verses)
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Sanskrit Text
अशोचत्तत्र
वैदर्भी
किं
नु
मे
दुष्कृतं
कृतम्
।
योऽपि
मे
निर्जनेऽरण्ये
संप्राप्तोऽयं
जनार्णवः
।
हतोऽयं
हस्तियूथेन
मन्दभाग्यान्ममैव
तु
॥
Padaccheda (Word Analysis)
अशोचत् | तत्र | वैदर्भी | किं | नु | मे | दुष्कृतं | कृतम्
यो | ऽपि | मे | निर्जने | ऽरण्ये | सम्प्राप्तो | ऽयं | जनार्णवः
हतो | ऽयं | हस्तिन् + यूथ | मन्दभाग्यान् | मद् + एव | तु
यो | ऽपि | मे | निर्जने | ऽरण्ये | सम्प्राप्तो | ऽयं | जनार्णवः
हतो | ऽयं | हस्तिन् + यूथ | मन्दभाग्यान् | मद् + एव | तु