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Currently viewing: Parva 3 -
Chapter 3.47
(12 verses)
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Sanskrit Text
न
तत्र
कश्चिद्दुर्वर्णो
व्याधितो
वाप्यदृश्यत
।
कृशो
वा
दुर्बलो
वापि
दीनो
भीतोऽपि
वा
नरः
॥
Padaccheda (Word Analysis)
न | तत्र | कश्चिद् | दुर्वर्णो | व्याधितो | वा + अपि + दृश्
कृशो | वा | दुर्बलो | वा + अपि | दीनो | भीतो | ऽपि | वा | नरः
कृशो | वा | दुर्बलो | वा + अपि | दीनो | भीतो | ऽपि | वा | नरः